गोवा, पणजी
संवाददाता: राहुल सरपाते की रिपोर्ट
पणजी २० मे
गोवा सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया मंचों पर चल रहे कथित “₹1000 करोड़ के घोटाले” के आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से भ्रामक, तथ्यहीन और निराधार बताया है।
क्या है पूरा मामला?
विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, सोशल मीडिया पर जिन तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर और तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, वे दरअसल एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यह मामला Class I-AA (Super) श्रेणी के अंतर्गत एक ठेकेदार के सूचीकरण (Enlistment) के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों के नियमित सत्यापन (Verification) से जुड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक रूटीन कार्यवाही है, जिसकी जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के तहत की जा रही है।
विभाग की मुख्य बातें:
- कोई वर्क ऑर्डर जारी नहीं: विभाग ने साफ किया कि संबंधित ठेकेदार को इस श्रेणी में सूचीबद्ध (Enlist) करने के बाद कोई भी कार्यादेश (Work Order) जारी नहीं किया गया है। जब कोई काम ही नहीं दिया गया, तो ₹1000 करोड़ के घोटाले का दावा पूरी तरह झूठा है।
- पारदर्शी प्रक्रिया: गोवा में ठेकेदारों के सूचीकरण और निविदा (Tender) मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और यह एक बहु-स्तरीय तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच प्रणाली के तहत काम करती है।
- कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: बिना तथ्यों की पुष्टि किए सनसनीखेज दावे करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और व्यक्तियों के खिलाफ विभाग अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। विभाग और उसके अधिकारियों की छवि धूमिल करने के प्रयास के विरोध में कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग का बयान:
“जनता को गुमराह करने और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से यह अफवाह फैलाई जा रही है। विभाग पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और हर शिकायत की जांच नियमानुसार की जाती है।”इस स्पष्टीकरण के बाद लोक निर्माण विभाग ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी किसी भी अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें।












